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तरंग (Waves)

प्रकाश व ध्वनि दोनों ही तरंग रूप में गमन करते  हैं। पदार्थ के अंतरण के बिना ही ऊर्जा के अंतरण (गमन) को तरंग गति कहते हैं। तरंग के इस रूप को जिसमें कणों की गति तरंग गति के लम्बवत् हो अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) कहलाते हैं,। प्रकाश की तरंग अनुप्रस्थ तरंग होती है। जब किसी माध्यम में यांत्रिक तरंगें इस प्रकार चलती हैं कि माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में समांतर कंपन करते हैं तो ऐसी तरंगों को अनुदैध्र्य (longitudinal) तरंगें कहते हैं।

तरंग के उच्चतम व निम्नतम भागों को क्रमश: शीर्ष (crest) व गर्त (trough) कहते हैं। ‘A’ दूरी तरंग का आयाम (amplitude) होता है।

तरंग दैध्र्य (λ) तरंगों की अनुप्रस्थ तरंग के मामले में निकटवर्ती दो शीर्षों (अथवा गर्तों) के मध्य की दूरी अथवा अनुदैध्र्य तरंग के मामले में निकटवर्ती दो संपीडनों में (अथवा विरलनों) के मध्य की दूरी को व्यक्त करती है।

तरंग की आवृत्ति V (frequency) उन तरंगों की संख्या है जो किसी बिंदु से प्रति सेकेण्ड गुजरती हैं। आवृत्ति का मात्रक कंपन/सेकेण्ड अथवा हटज (Hz) है।

सभी प्रकार की तरंगों की गति के लिए समीकरण –

V = vλ (तरंग की आवृत्ति 1 तथा तरंग दैध्र्य द्य है)

विद्युत-चुम्बकीय विकिरण

विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती तथा ये तरंगें निर्वात (space) में भी संचरित हो सकती हैं। ये तरंगें चुम्बकीय एवं विद्युत क्षेत्रों के दोलन से उत्पन्न होने वाली अनुप्रस्थ तरंगें हैं। प्रकाश तरंगें, ऊष्मीय विकिरण, एक्स किरणें, रेडियो तरंगें आदि विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के उदाहरण हैं। इन तरंगों का तरंग दैध्र्य परास (wave length) काफी विस्तृत होता है। इनका परास 10-14 मी. से लेकर 104 मी. तक होता है।

विद्युत-चुम्बकीय स्पेक्ट्रम

सूर्य के प्रकाश में स्पेक्ट्रम में लाल रंग से लेकर बैंगनी रंग तक दिखाई पड़ते हैं। सूर्य के प्रकाश व स्पेक्ट्रम का विस्तार लाल रंग के ऊपर तथा बैंगनी रंग के नीचे भी होता है जिसे अदृश्य स्पेक्ट्रम (invisble spectrum) कहते हैं। लाल रंग के ऊपर बड़ी तरंग दैध्र्य वाले भाग को अवरक्त स्पेक्ट्रम (infrared spectrum) तथा बैंगनी रंग से नीचे छोटी तरंग दैध्र्य वाले भाग को पराबैंगनी स्पेक्ट्रम (Ultra violet spectrum) कहते हैं।

ध्वनि तरंगे

ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक तरंगों के रूप में गमन करती है।  ध्वनि तरंगें अनुदैध्र्य यांत्रिक तरंगें होती हैं। ध्वनि तरंगें ध्रुवित (Polarised) नहीं हो सकती हैं। ध्वनि तरंगों के गमन के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। इन तरंगों में व्यतिकरण (interference) होता है।

ध्वनि तरंगों का आवृत्ति परास

  • शृव्य तरंगें (audible waves) – ये यांत्रिक तरंगें हैं जिनकी आवृत्ति का परास 20 हत्जर् से लेकर 20,000 हत्जर तक होता है। इन तरंगों को हम सुन सकते हैं।
  • अवशृव्य तरंगें (Infrasonic waves)- ये यांत्रिक तरंगें है जिनकी आवृत्ति 20 हत्जर् से कम होती है। ये तरंगें हमें सुनाई नहीं देती है।
  • पराशृव्य तरंगें (Ultrasonic waves)- वे अनुदैध्र्य यांत्रिक तरंगें हैं, जिनकी आवृत्ति 20,000 हत्जर् से अधिक होती है। मनुष्य के कान इन्हें नहीं सुन सकते हैं।

ध्वनियों के लक्षण

ध्वनियों के मुख्यत: तीन लक्षण होते हैं-

  • तीव्रता (Intensity)– तीव्रता ध्वनि का वह लक्षण है, जिसके कारण हमें कोई ध्वनि धीमी अथवा तेज सुनाई देता है।
  • तारत्व (pitch) – तारत्व ध्वनि का वह लक्षण है, जिसके कारण हम ध्वनि को मोटी या पतली कहते हैं।
  • गुणवत्ता (Quality)- गुणवत्ता ध्वनि का वह लक्षण है, जो समान तीव्रता व समान आवृत्तियों  की ध्वनियों में अंतर स्पष्टï करता है।

0oC पर विभिन्न माध्यमों से ध्वनि की चाल

माध्यम ध्वनि की चाल
शुष्क वायु 332 मी./से.
जल 1,450 मी./से.
लोहा 5,100 मी./से.
अल्युमिनियम 6,400 मी./से.
हाइड्रोजन 1,269 मी./से.
कार्बन-डाई-ऑक्साइड 260 मी./से.
समुद्री जल 1,533 मी./से.
पारा 1,450 मी./से.
काँच 5,640 मी./से.
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