भारतीय अर्थव्यवस्था : भारत में बैंकिंग

 

भारत में बैंकिंग का इतिहास काफी प्राचीन है। भारतीयों द्वारा स्थापित प्रथम बैंकिंग कंपनी अवध कॉमर्शियल बैंक (1881) थी। 1940 के दशक में 588 बैंकों की असफलता के कारण कड़े नियमों की जरूरत महसूस की गई। फलस्वरूप बैंकिंग कंपनी अधिनियम फरवरी 1949 में पारित हुआ, जो बाद में बैंकिंग नियमन अधिनियम के नाम से संशोधित हुआ।  19 जुलाई, 1969 को 14 प्रमुख बैंकों (जिनमें जमा राशि 50 करोड़ रु. से अधिक थी) का राष्ट्रीयकरण किया गया। बाद में अप्रैल 1980 में 6 और बैंकों का भी राष्टरीयकरण किया गया। राष्टरीयकरण के बाद के तीन दशकों में देश में बैंकिंग प्रणाली का असाधारण गति से विस्तार हुआ- भौगोलिक लिहाज से भी और वित्तीय विस्तार की दृष्टिï से भी। 14 अगस्त, 1991 को एक उच्च-स्तरीय समिति वित्तीय प्रणाली के ढांचे, संगठन, कामकाज और प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं की जाँच करने के लिए नियुक्त की गई। एम. नरसिंहम की अध्यक्षता में बनी इस समिति की सिफारिशों के आधार पर 1992-93 में बैंकिंग प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए।

हाल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा किये गये एक स्ट्रेस टेस्ट के अनुसार भारतीय बैंकिंग प्रणाली किसी भी तरह के आर्थिक संकट और ऊँची नॉन-परफॉर्र्मिंग परिसंपत्तियों के झटकों को सहन करने में पूरी तरह से सक्षम है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास सोने का दुनिया में 10वां सबसे बड़ा भंडार है। नवंबर 2009 में रिजर्व बैंक ने 6.7 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 मीट्रिक टन सोने की खरीद की थी। इस खरीद से उसके विदेशी मुद्रा कोष में गोल्ड होल्डिंग्स की हिस्सेदारी बढ़ गई है। पहले गोल्ड होल्डिंग्स की हिस्सेदारी इसमें 4 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 6 प्रतिशत हो गई है।

यूनाईटेड किंगडम स्थित ब्रांड फाइनेंस द्वारा किये गये वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग अध्ययन के अनुसार 20 भारतीय बैंकों को ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल बैंकिंग 500 की सूची में शामिल किया गया है। वस्तुत: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भारत की ऐसी पहली बैंक बन गई है जिसे दुनिया की पचास बैंकों की सूची में स्थान मिला है। इसे पचास बैंकों के मध्य 36वां स्थान मिला है। 2009 में जहां स्टेट बैंक की ब्रांड वैल्यू 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर थी वहीं यह 2010 में 4.6 अरब डॉलर हो गई है। आईसीआईसीआई बैंक को दुनिया की 100 श्रेष्ठ बैंकों की सूची में स्थान मिला है। इसकी ब्रांड वैल्यू 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर है।

बैंकों का वित्तीय प्रदर्शन

भारत की अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की 2008-09 की बैलेंस शीट यह दर्शाती हैं कि इनकी वित्तीय स्थित काफी संतोषजनक है। लेकिन  ये बैंकें भी ग्लोबल आर्थिक संकट से पूरी तरह से अछूती नहीं रही थीं। मार्च 2009 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कांसॉलीडेटेट बैलेंस शीट यह दर्शाती हैं कि इनकी वृद्धि दर 21.2 प्रतिशत रही। जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में वृद्धि दर 25.0 प्रतिशत रही थी। सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों में जहां वृद्धि दर सकारात्मक रही वहीं निजी व विदेशी बैंकों ने नकारात्मक वृद्धि दर दर्ज की। ग्लोबल आर्थिक संकट के दौरान अधिकांश लोगों ने अपने पैसे को सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों में जमा करना मुनासिब समझा। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की डिपॉजिट और क्रेडिट के विषय में रिजर्व बैंक की तिमाही आंकड़ों के संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल आर्थिक संकट के दौरान राष्ट्रीयकृत बैंकों, विदेशी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के डिपॉजिट क्रमश: 17.8 प्रतिशत, 5.6 प्रतिशत और 3.0 प्रतिशत रहे।

जहां तक सकल बैंक क्रेडिट का सवाल है, राष्ट्रीयकृत बैंकों ने देश में बैंकों द्वारा बांटे गये ऋण का 50.5 प्रतिशत बांटा। इसमें भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 23.7 प्रतिशत ऋण बांटा। विदेशी बैंकों व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने क्रमश: 5.5 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत ऋण ही बांटे। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की देश में कुल 34,709 शाखाएं हैं।

पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequate Ratio) : भारतीय बैंकिंग प्रणाली ने ग्लोबल आर्थिक संकट का डटकर मुकाबला किया है। यह उसके सुधरे हुए पूंजी पर्याप्तता अनुपात से जाहिर होता है। मार्च 2009 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पूंजी पर्याप्तता अनुपात में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के आदेशों के अनुसार इसे कम-से-कम 9.0 प्रतिशत होना अनिवार्य है।

भारत में अनुसूचित बैंकों की सूची 

  •   इलाहाबाद बैंक- देश की सबसे पुरानी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंक
  •   आंध्र बैंक
  •   बैंक ऑफ बड़ौदा
  •   बैंक ऑफ इंडिया
  •   बैंक ऑफ मदुरा
  •   बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  •   बैंक ऑफ पंजाब
  •   बैंक्यू नेशनाले डि पेरिस-इंडिया- अग्रणी ग्लोबल बैंक जो कार्पोरेट व विदेशी संस्थागत निवेशकों को सेवा प्रदान करती है
  •   केनरा बैंक
  •   सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया- यह एक वाणिज्यिक बैंक है जो क्रेडिट, डिपॉजिट और इंटरनेशनल बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराती है
  •   सेंचुरियन बैंक लिमिटेड
  •   सेंचुरियन बैंक
  •   सिफर सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड- यह एक इन्वेस्टमेंट बैंक है जो प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपीटल के द्वारा फंड इकठ्ठा करती है
  •   सिटी बैंक- यह एक ग्लोबल कन्ज्यूमर बैंक है
  •   कार्पोरेशन बैंक
  •   कॉस्मोस बैंक- मल्टीस्टेट सिड्यूल्ड कोऑपरेटिव की सेवाएं प्रदान करती है
  •   देना बैंक
  •   डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक
  •   एक्जिम बैंक अथवा एक्पोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया
  •   फेडरेल बैंक लिमिटेड
  •   गार्जियन सहकार बैंक नियामिता- समाज के कमजोर वर्र्गों को वित्तीय सेवा व लोन प्रदान करने वाली कोऑपरेटिव बैंक
  •   ग्लोबल ट्रस्ट बैंक- प्राइवेट बैंकिंग फर्म
  •   एचडीएफसी बैंक लिमिटेड- अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक जो नेट बैंकिंग और कंज्यूमर लोन के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय है
  •   हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक लिमिटेड
  •   आईसीआईसीआई बैंक (द इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड ऑफ इंडिया
  •   आईडीबीआई बैंक- आईडीबीआई और सिडबी द्वारा प्रोमोट की जाने वाली प्राइवेट सेक्टर बैंक
  •   इंडियन बैंक
  •   इंडियन ओवरसीज बैंक
  •   इंडसइंड बैंक लिमिटेड- प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग कंपनी
  •   इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया- औ ोगिक और वित्तीय वृद्धि को प्रोमोट करने वाली बैंक
  •   इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईआईबीआई)
  •   जम्मू-कश्मीर बैंक
  •   जम्मू-कश्मीर बैंक लिमिटेड- निजी क्षेत्र की बैंक
  •   कल्याण बैंक
  •   कपोल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड
  •   लक्ष्मी विलास बैंक
  •   मांडवी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड- कोऑपरेटिव सेक्टर का बैंकिंग संगठन
  •   नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलरमेंट- कृषि क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने वाली बैंक
  •   नेशनल हाउसिंग बैंक- गृह वित्त संस्थानों को प्रोमोट करने वाली बैंक
  •   ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स- मर्र्चेंट बैंकिंग, अनिवासी भारतीयों को सेवा देने वाली और रूरल बैंकिंग के क्षेत्र में सक्रिय राष्ट्रीयकृत बैंक
  •   पंजाब नेशनल बैंक
  •   पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक प्राइवेट लिमिटेड
  •   पंजाब एंड सिंध बैंक
  •   रत्नाकर बैंक लिमिटेड- नेट बैंकिंग और लॉकर सुविधा देने वाली बैंक
  •   सारस्वत कोऑपेरटिव बैंक लिमिटेड- कार लोन देने वाली अनुसूचित बैंक
  •   एसबीआई कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड
  •   स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया- लघु उ ोगों को ऋण देने वाला बैंक
  •   स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
  •   स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
  •   स्टेट बैंक ऑफ इंदौर
  •   स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
  •   स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र
  •   स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर
  •   सिंडीकेट बैंक
  •   यूनाईटेड कॉमर्शियल बैंक
  •   यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
  •   यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया
  •   यूनाईटेड बैंक ऑफ इंडिया
  •   विजया बैंक

निजी बैंक

वर्ष 1993 में बैंकिंग प्रणाली में अधिक उत्पादकता और कुशलता लाने के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली में निजी क्षेत्र को नए बैंक खोलने की अनुमति दी गई। इन बैंकों को अन्य बातों के साथ निम्नलिखित न्यूनतम शर्तों को पूरा करना था-

(i) यह बैंक एक पब्लिक लि. कंपनी के रूप में पंजीकृत हो;  (ii) न्यूनतम प्रदत्त पूँजी 100 करोड़ रु. हो, बाद में इसे बढ़ाकर 200 करोड़ कर दिया गया; (iii) इसके शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हों; (iv) बैंक का कामकाज, हिसाब-किताब या लेखा तथा अन्य नीतियाँ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित विवेकपूर्ण मानकों के अनुरूप हों। 

 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक

प्रथम राष्ट्रीयकरण- 19 जुलाई, 1969 को 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया-

  •   बैंक ऑफ इंडिया
  •   यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
  •   बैंक ऑफ बड़ौदा
  •   बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  •   पँजाब नेशनल बैंक
  •   इंडियन बैंक
  •   इंडियन ओवरसीज़ बैंक
  •   सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
  •   केनरा बैंक
  •   सिंडीकेट बैंक
  •   यूनाइटेड कॉमर्शियल बैंक
  •   इलाहाबाद बैंक
  •   यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
  •   देना बैंक

द्वितीय राष्टरीयकरण- 15 अप्रैल, 1980 को 6 अन्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया-

  •   आंध्र बैंक
  •   कॉर्पोरेशन बैंक
  •   न्यू बैंक ऑफ इंडिया
  •   ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
  •   पँजाब एंड सिंध बैंक
  •   विजया बैंक

अक्टूबर 1993 में न्यू बैंक ऑफ इंडिया का विलय पँजाब नेशनल बैंक में  कर दिया गया। वर्तमान में  देश में 19 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं।

स्टॉक मार्केट 

भारतीय स्टॉक मार्केट में कुल 22 स्टॉक एक्सचेंज हैं। इनमें से बांबे स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और ओवर द काउंटर स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अनुसार देश में 13 अगस्त 2009 तक कुल 1680 पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशक थे। इस अवधि तक इन निवेशकों ने कुल 65.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था।

ब्लूमरैंग द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर 2009 तक भारतीय स्टॉक मार्केट का कुल बाजार पूंजीकरण विश्व के कुल बाजार पूंजीकरण का 2.8 प्रतिशत था। वर्ष 2009 के दौरान कुल 4.18 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 21 आईपीओ बाजार में उतारे गये जबकि इसकी तुलना में 2008 में कुल 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 36 आईपीओ जारी किये गये।

बांबे स्टॉक एक्सचेंज

बांबे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना 1875 में की गई थी। यह एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। अधिसूचित कंपनियों के लिहाज से बीएसई विश्व का पहले नंबर का स्टॉक एक्सचेंज है। इसमें कुल 5,500 कंपनियां अधिसूचित हैं। 31 दिसंबर 2007 तक इसका कुल बाजार पूंजीकरण 1.79 खरब अमेरिकी डॉलर था। बीएसई का सूचकांक सेंसेक्स 30 कंपनियों के शेयरों से निर्धारित होता है। इसमें सीमेंट, दूरसंचार, रियल इस्टेट, बैंकिंग, आईटी, निर्माण, आटोमोबाइल, ऑयल, फार्मास्युटिकल्स, ऊर्जा और स्टील क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। सेंसेक्स में शामिल प्रमुख कंपनियां हैं- इंफोसिस टेक्नोलॉजीस, रिलायंस, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाटा मोटर्स। एक्सचेंज में कुल 22 सूचकांक हैं जिसमें 12 सेक्टर शामिल हैं।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज

प्रतिदिन के टर्नओवर के लिहाज से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज देश का सबसे बड़ा सिक्योरिटी एक्सचेंज है। 19 मई, 2009 को एनएसई का कुल टर्नओवर 8.33 अरब रु. था। 1992 से ही एनएसई में एक एडवांस्ड आटोमेटेड इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम है जिसे देश के 1486 जगहों से एक्सेस किया जा सकता है। जून 1994 से एनएसई ने थोक ऋण बाजार सेगमेंट में अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया था। नवंबर 1994 से इक्विटी सेगमेंट की शुरूआत हो गई जबकि डेरीवेटिव्स सेगमेंट की शुरूआत जून 2000 से हो गई। निफ्टी एक्सचेंज में 20 बैंक और बीमा कंपनियां शामिल हैं।

निफ्टी सूचकांक का निर्धारण 21 उ ोगों की 50 कंपनियों द्वारा होता है। इसमें सीमेंट, दूरसंचार, फार्मास्युटिकल्स, बैंकिंग, आटोमोबाइल, निर्माण, अल्युमिनियम, तेल खोज, गैस व वित्त क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। प्रमुख कंपनियों में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स, भारती एयरटेल, केर्न इंडिया, गेल, हीरो होंडा मोटर्स, हिंदुस्तान यूनीलीवर, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन और इंफोसिस टेक्नोलॉजीस शामिल हैं।

ओवर द काउंटर एक्सचेंज : 1990 में स्थापित ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ इंडिया देश का एकमात्र ऐसा एक्सचेंज है जो पिछले तीन साल से कार्यरत लघु व मध्यम श्रेणी की कंपनियों को कैपीटल मार्केट से पैसे उठाने में मदद देता है।

भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना 12 अप्रैल 1992 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के तहत की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। एनएसई प्रतिभूति बाजार में परिवर्तन के लिए एजेंडा तय करने में लगा हुआ है। पिछले पांच वर्र्षों में सेबी के प्रयासों की वजह से देश के 363 शहरों के निवेशक बाजार से ऑनलाइन जुड़े हैं। साथ ही बाजार में पूर्ण पारदर्शिता, वित्तीय लेन-देन के निपटारे की गारंटी, वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन और व्यावसायिक तौर से प्रबंधित संकेतकों का प्रचलन और देश भर में डिमैट का प्रचलन संभव हो सका है।

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