भारतीय राजनीति:राज्यों का स्वरूप

 

कार्यपालिका

राज्य संघ के संविधान से शासित होते हैं। यह प्रावधान संविधान में निर्दिष्टï अनुच्छेद 370 के अनुसार जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए लागू नहीं है। वहाँ संविधान अनुपालन हेतु विशेष उपबंध हैं। राज्यों की कार्यपालिका के प्रमुख संघटक इस प्रकार हैं-

राज्यपाल

राज्य की कार्यपालिका के अन्तर्गत राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद् होती है। राज्यपाल की नियुक्ति भारत का राष्टरपति पाँच वर्ष की अवधि के लिए करता है और उसका कार्यकाल राष्टरपति की इच्छा पर निर्भर करता है। 35 वर्ष से अधिक आयु वाले केवल भारतीय नागरिक को ही इस पद पर नियुक्त किया जा सकता है। राज्य की कार्यपालिका के सारे अधिकार राज्यपाल में निहित होते हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में  मंत्रिपरिषद्, राज्यपाल को उनके कार्यों में सहायता करती है और सलाह देती है। सभी राज्यों  में संवैधानिक तंत्र की असफलता की रिपोर्ट राष्टï्रपति को भेजने अथवा राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव को स्वीकृति देने से सम्बन्धित मामलों में स्वेच्छा और स्वविवेक से निर्णय लेना होता है।

मंत्रिपरिषद

मुख्यमंत्री राज्यपाल के द्वारा नियुक्त किया जाता है तथा उसी के द्वारा  मुख्यमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की भी नियुक्ति की जाती है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

विधानमंडल

प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल होता है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल के अतिरिक्त एक या दो सदन होते हैं। बिहार, महाराष्टर, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में विधानमंडल के दो सदन हैं जिन्हें विधान परिषद और विधानसभा कहते हैं। शेष राज्यों में विधानमंडल का केवल एक ही सदन है, जिसे विधानसभा कहा जाता है

विधान परिषद

प्रत्येक राज्य की विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक तिहाई से अधिक तथा किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं होगी (संविधान की धारा 50 के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर विधान परिषद में 36 सदस्य हैं)। 

विधानसभा

किसी राज्य की विधानसभा में अधिक से अधिक 500 तथा कम से कम 60 सदस्य होते हैं (संविधान के अनुच्छेद 371 के अनुसार सिक्किम विधानसभा में 32 सदस्य हैं)। इनका निर्वाचन उस राज्य के प्रत्येक क्षेत्रीय निर्वाचन-क्षेत्रों से  मतदान द्वारा होता है। विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, बशर्ते वह पहले भंग न कर दी जाए।

केन्द्र शासित प्रदेश

केन्द्र शासित प्रदेशों का शासन राष्टरपति द्वारा चलाया जाता है। अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पुदुचेरी के प्रशासकों को उपराज्यपाल कहा जाता है, जबकि चंडीगढ़ का प्रशासक मुख्य आयुक्त कहलाता है। राष्टरीय राजधानी दिल्ली और केन्द्रशासित प्रदेश पुदुचेरी की अपनी-अपनी विधानसभाएं और मंत्रिपरिषद हैं।

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