IAS Lecture Series : Indian Economy-2

 

क्या होता है सी आर आर ( Cash Reserve Ratio)?

मेरे एक रिश्तेदार का लड़का सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली के मुखर्जी  नगर में रह रहा है । उसके पिताजी उसके रहने खाने के लिए प्रति माह रूपये भेजा करते है ताकि वह अच्छी तरह से पढाई कर सके । लेकिन जब कभी वे आते है तब उन्हें देखते है कि लड़के ने नयी मोबाइल खरीदी है तो कभी नए कपडे इत्यादी ख़रीदे है| तो उन्हें लगता है कि लड़के को वे जरुरत से ज्यादा रूपये तो नहीं भेज रहे है, जिससे रूपये कि नकद बचत हो जाने से उनका लड़का कि क्रय शक्ति अर्थात उसके महंगी बस्तुएं खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है और  वह इस प्रकार कि वस्तु खरीद पाता है| तो उन्होंने अगले महीने से कुछ कम रकम भेजी शुरु कर दी ताकि लड़के के पास नकद रूपये कम रह पाए अगली बार जब वे आए तो उन्होंने देख की लड़के ने दूध और फल खाना छोड़ दिया है यह देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अगले माह से उसके पास नकद पैसे की बहुत ज्यादा दिक्कत न हो इसलिए कुछ ज्यादा रूपये भेजने शुरू कर दिए जिससे उसके आवश्यक कार्यो के लिए रूपये कम न पड़े ।अर्थात जब उन्हें लगता है की लड़के के पास नकद रूपये अधिक हो रहे है और उसका वह दुरूपयोग कर सकता है जैसे की गर्लफ्रेंड,शराब, सिगरेट इत्यादी अनावश्यक मदों पर खर्च कर सकता है तो उसके पास नकद कम करने की जुगत करते है साथ ही जब उन्हें लगता है की लड़का उनका नकद के कमी की वजह से तकलीफ में न रहे तो नकद रूपये की जुगत करते है जिससे उसके खर्च और आवश्यक कार्यो के बीच संतुलन बना रहे ।

पिता का कार्य भारत सरकार का रिजर्व बैंक करता है और लड़के विभिन्न व्यवसायिक बैंक है जिनके माध्यम से नकद और खर्च के बीच संतुलन बनाने के लिए सी आर आर (नकद आरक्षी अनुपात ) को  बढाने और घटाने का कार्य किया जाता है । सी आर आर विभिन्न व्यवसायिक बैंक के द्वारा रिज़र्व बैंक के पास जमा बैंक के कुल जमा रकम का एक हिस्सा है |सभी बैंकों के लिए जरूरी होता है कि वह अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा रखें। इसे नकद आरक्षी अनुपात कहते हैं। जिसको निम्नलिखित कारणों से जमा किया जाता है

अगर किसी भी मौके पर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में जमाकर्ता अपना पैसा निकालने आ जाएं तो बैंक डिफॉल्ट न कर सके।

अब सवाल है कि सी आर आर  बढ़ाने से क्या होता है ? 

  • आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बिना बाजार से तरलता कम करना चाहता है, तो वह सीआरआर बढ़ा देता है।
  • इससे बैंकों के पास बाजार में कर्ज देने के लिए कम रकम बचती है।
  • अर्थात रिजर्व  बैंक सी आर आर को बढ़ा कर नकदी पर कंट्रोल करना चाहता  है  जिससे इन्फ्लेशन (मुद्रा स्फीति ) रोकने में मदद मिलती है ।
  • सी आर आर वह डोर है जिससे बाज़ार में जब बहुत अधिक नकद हो जाती है तो डोर खींच कर अर्थात सी आर आर बढ़ाकर रिजर्व बैंक नकद की कमी कर देता है और बाज़ार में दैनिक कार्यो की निपटारा के लिए जब नकदी की कमी होती है तो डोर में ढील देकर अर्थात सी आर आर कमी कर बाज़ार में नकदी की आपूर्ति कर देता है ।

अब सवाल है कि सी आर आर में कमी करने से किस प्रकार बाज़ार प्रभावित होता है  ?

  • बैंक को अपने रूपये कम रिज़र्व बैंक के पास जमा करना पड़ता है जिससे होम लोन, कार लोन इत्यादी देने में उदारता दिखता है लोगो को लोन आसानी से मिल जाता है
  • लोगो को आसानी से लोन इत्यादी मिलने से उनकी क्रय शक्ति बढ़ जाता है
  • जिससे बाज़ार में खरीदने वालो कि संख्या बढ़ जाती है ।जब एक ही वास्तु को खरीदने वाले कई लोग होंगे तो उसकी कीमत बढ़ना स्वाभाविक है । इस प्रकार इन्फ्लेसन बढ़ जाता है ।
  • फिर भी सी आर आर सिर्फ एक कारक है बाज़ार में इन्फ्लेसन को कण्ट्रोल में रखने के लिए रिवर्स रेपो रेट और रेपो रेट का भी अहम् रोल होता है जिसके बारे में जानने के लिए अगले लेखन की प्रतीक्षा करे ।

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